विद्युत

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहां जाएं: भ्रमण, खोज
गणराज्य कला पर्यटन दर्शन इतिहास धर्म साहित्य सम्पादकीय सभी विषय ▼

(अंग्रेज़ी:Electricity) विद्युत आवेश की उपस्थिति तथा बहाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न उस सामान्य अवस्था को विद्युत कहते हैं जिसमें अनेकों कार्यों को सम्पन्न करने की क्षमता होती है।

स्थिर विद्युत

आज से हज़ारों वर्ष पूर्व, क़रीब 600 ई. पू. में यूनान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थेल्स ने पाया कि जब अम्बर नामक पदार्थ को ऊन के किसी कपड़े से रगड़ा जाता है तो उसमें छोटी-छोटी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण आ जाता है। प्रारम्भ में स्वयं थेल्स भी इस घटना को न समझ सके तथा उन्होंने सोचा कि अम्बर में यह आकर्षण का गुण उसके अपने विशिष्ट गुणों के कारण होता है। तथा यह आकर्षण का गुण केवल अम्बर में ही पाया जाता है।

विद्युत धारा

आवेश के प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं। ठोस चालकों में आवेश का प्रवाह इलेक्ट्रॉनों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण के कारण होता है, जबकि द्रवों जैसे- अम्लों, क्षारों व लवणों के जलीय विलयनों तथा गैसों में यह प्रवाह आयनों की गति के कारण होता है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध


टीका टिप्पणी और संदर्भ

-

फ़ेसबुक पर भारतकोश (नई शुरुआत)
प्रमुख विषय सूची
फ़ेसबुक पर शेयर करें


गणराज्य कला पर्यटन जीवनी दर्शन संस्कृति प्रांगण ब्लॉग सुझाव दें
इतिहास भाषा साहित्य विज्ञान कोश धर्म भूगोल सम्पादकीय


Book-icon.png संदर्भ ग्रंथ सूची
ऊपर जायें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

अं
क्ष त्र ज्ञ श्र अः



निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
भ्रमण
सहायक उपकरण
सुस्वागतम्
संक्षिप्त सूचियाँ
सहायता