कटिबन्ध  

कटिबन्ध से तात्पर्य है कि, प्रत्येक गोलार्द्ध को ताप के आधार पर कई भागों में बाँटा गया है, इन भागों को ही 'कटिबन्ध' कहते हैं। ये क्षेत्र विषुवत रेखा से दूरी के अनुसार बाँटे जाते हैं, क्योंकि पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में सूर्य की किरणे कितनी लम्बवत गिरती हैं, यह उस स्थान की विषुवत रेखा से दूरी पर निर्भर करता है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=कटिबन्ध&oldid=236612" से लिया गया