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गोवर्धन मठ  

गोवर्धन मठ (अंग्रेज़ी: Govardhan Math) भारत के पूर्वी भाग में उड़ीसा राज्य के पुरी नगर में स्थित है। इस मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'आरण्य' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है, जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। ये जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा हुआ है। बिहार से लेकर अरुणाचल प्रदेश के सारे धार्मिक स्थान इसी मठ के अंतर्गत आते हैं।

देवी-देवता

यहाँ के देवता जगन्नाथ (भगवान विष्णु) और देवी विमला (भैरवी) हैं। यहाँ का महावाक्य 'प्रज्ञानं ब्रह्म' है। यहाँ गोवर्धननाथ कृष्ण और अर्धनारेश्वर शिव के श्रीविग्रह आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित हैं।

क्षेत्र

भारतीय उपमहाद्वीप के सम्पूर्ण पूर्व भाग को श्री गोवर्धन पीठ का क्षेत्र माना जाता है। इसमें बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजमुंदरी तक आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और प्रयाग तक उत्तर प्रदेश के भारतीय राज्य शामिल हैं। साथ ही नेपाल, बांग्लादेश और भूटान देश भी इस मठ का आध्यात्मिक क्षेत्र माना जाता है। इस मठ के अंतर्गत पुरी, इलाहाबाद, पटना और वाराणसी आदि पवित्र स्थान आते हैं।

शंकराचार्य

वैदिक सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने वाले आदि शंकराचार्य के द्वारा स्थापित चार प्रमुख संस्थानों में एक है गोवर्धन मठ। शंकर के चार प्रमुख शिष्यों पद्मपाद, हस्तामलक, वर्तिकाकर और त्रोटकाचार्य को भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के इन चार प्रमुख शिक्षण संस्थानों का दायित्व सौंपा गया था। इन मठों के संस्थापक आदि शंकर के सम्मान में बाद के मठाधीशों में से प्रत्येक को शंकराचार्य के तौर पर ही जाना जाता जाता है। इस तरह ये अद्वैत वेदान्त के रक्षक माने जाने वाले दशनामी सन्यासियों के प्रमुख भी माने जाते हैं। ज्ञान की ये प्रमुख चार गद्दियाँ पुरी (ओडिशा), श्रृंगेरी (कर्नाटक), द्वारका (गुजरात) और ज्योतिर्मठ (या जोशीमठ) में स्थित हैं।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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