तिरुवांकुर  

तिरुवांकुर अथवा 'त्रिवंकुर' केरल के 'ट्रावनकोर' का ही प्राचीन नाम है। इसका अर्थ है- 'लक्ष्मी का घर'। तिरुवांकुर का प्रदेश प्राचीन काल में केरल में सम्मिलित था।

  • एक पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि परशुराम ने इस भू-भाग को अपने परशु द्वारा समुद्र से छीन लिया था।
  • परशुराम ने अपना फरसा समुद्र में फेंका और जितनी दूर वह जाकर गिरा उतनी दूर तक समुद्र पीछे हट गया।
  • इस समुद्र निर्गत भूमि पर परशुराम ने बाहर से मनुष्यों को लाकर बसाया था।
  • इस कथा में एक भौगोलिक तथ्य निहित है, क्योंकि भूगोलविदों का विचार है कि केरल के प्रदेश पर पहले समुद्र लहराता था, जिसके अवशेष लेगूनों[1] के रूप में आज भी विद्यमान हैं।


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ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 403 |

  1. लगून्स

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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