भारतकोश के संस्थापक/संपादक के फ़ेसबुक लाइव के लिए यहाँ क्लिक करें।

वा पटपीत की फहरानि -सूरदास  

Icon-edit.gif इस लेख का पुनरीक्षण एवं सम्पादन होना आवश्यक है। आप इसमें सहायता कर सकते हैं। "सुझाव"
वा पटपीत की फहरानि -सूरदास
सूरदास
कवि महाकवि सूरदास
जन्म संवत 1535 वि.(सन 1478 ई.)
जन्म स्थान रुनकता
मृत्यु 1583 ई.
मृत्यु स्थान पारसौली
मुख्य रचनाएँ सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य-लहरी, नल-दमयन्ती, ब्याहलो
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
सूरदास की रचनाएँ
  • वा पटपीत की फहरानि -सूरदास

वा पटपीत[1] की फहरानि।
कर धरि[2] चक्र चरन की धावनि, नहिं बिसरति वह बानि॥[3]
रथ तें उतरि अवनि[4] आतुर ह्वै,[5] कच[6] रज[7] की लपटानि।
मानौं सिंह सैल[8] तें निकस्यौ महामत्त गज जानि॥
जिन गुपाल मेरा प्रन राख्यौ मेटि वेद की कानि।[9]
सोई सूर सहाय हमारे निकट भये हैं आनि॥
  


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पीताम्बर।
  2. हाथ में लेकर।
  3. बानिक, रूप।
  4. भूमि।
  5. जल्दी में घबरा-कर।
  6. बाल।
  7. धूल
  8. पर्वत।
  9. मर्यादा।

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=वा_पटपीत_की_फहरानि_-सूरदास&oldid=258041" से लिया गया