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स्पीड पोस्ट  

स्पीड पोस्ट सेवा 1 अगस्त, 1986 को शुरू किया गया था। इस सेवा के अंतर्गत पत्रों, दस्‍तावेजों और पार्सलों की डिलीवरी एक निश्‍चित अवधि के अंतर्गत की जाती है और अवधि में डिलीवरी न होने पर ग्राहक को डाक शुल्‍क पूर्ण रूप से वापस कर दिया जाता है। स्‍पीड पोस्‍ट नेटवर्क में 163 राष्‍ट्रीय और 953 राज्‍य स्‍पीड पोस्‍ट केंद्र शामिल हैं। यह सेवा अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भी 97 देशों में उपलब्‍ध है।

इंटरनेट आधारित स्‍पीड पोस्ट

इंटरनेट आधारित ट्रैक एंड ट्रेस सर्विस स्‍पीड नेट को 3 जनवरी, 2002 को शुरू किया गया था। ग्राहकों को स्‍पीड पोस्‍ट की गई चीजों के लिए ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करने के साथ यह प्रबंधन को सेवा की गुणवत्ता, व्‍यापार कार्य, ग्राहक सेवा विज्ञापन के बारे में सूचना भी प्रदान करता है। यह अब सभी 315 राष्‍ट्रीय स्‍पीड पोस्‍ट केंद्रों और 857 राज्‍य स्‍पीड केंद्रों में सेवा प्रदान कर रहा है।

पिनकोड लिखना अनिवार्य

यदि आपने स्पीड पोस्ट करवाने वाले लिफाफे पर पिन कोड नहीं लिखा है तो डाक विभाग इसे स्वीकार नहीं करेगा। क्योंकि डाक विभाग की ओर से स्पीड पोस्ट व रजिस्ट्री के लिए बुक की जाने वाली डाक पर पिन कोड लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। डाक को सुनिश्चित समय में तय स्थान पर पहुंचाने के लिए किया गया है। विभाग की ओर से इस संबंध में डाकघरों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। डाक विभाग के अनुसार स्पीड पोस्ट से बुक डाक देशभर में अधिकतम 24 से 72 घंटे में पहुंचा दी जाती है। ज़िले से विभिन्न स्थानों के लिए बुक किया गया पत्र पहले ज़िला मुख्यालय स्थित मुख्य डाकघर भेजा जाता है और उसके बाद वहां से नियत स्थानों के लिए बैग बनाकर रवाना किए जाते हैं। सेवा को लोकप्रिय बनाने के लिए विभाग की ओर से प्रतिदिन बुकिंग की मॉनीटरिंग भी की जाती है कि बुक की गई स्पीड पोस्ट का वितरण हुआ है या नहीं। 'स्पीड पोस्ट' के लिए पिन कोड की अनिवार्यता लागू की गई है। डाक को सुनिश्चित समय में तय स्थान पर पहुंचाने के लिए किया गया है। क्षेत्र विशेष के पिन कोड की जानकारी नहीं होने पर कर्मचारी द्वारा उपलब्ध करवाए जाते हैं।

पिनकोड का महत्व

डाक सूचकांक संख्या कोड या पिन कोड ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से एक विशेष स्थान को एक विशिष्ट सांख्यिकी पहचान दी जाती है। भारत में पिन कोड में 6 अंकों की संख्या होती है। इन्हें भारतीय डाक विभाग की ओर से छांटा जाता है। पिन प्रणाली को 15 अगस्त 1972 को आरंभ किया गया था।

पिन कोड की संरचना

भारत में 9 पिन क्षेत्र हैं। पिन कोड का पहला अंक देश के क्षेत्र और डाक खाना किस क्षेत्र में स्थित है, को दर्शाता है। दूसरा अंक उप क्षेत्र को बताता है। तीसरे अंक से क्षेत्र के अंदर किसी विशेष ज़िले का संकेत मिलता है और अंतिम तीन अंक अलग-अलग डाकखानों को आवंटित किए जाते हैं। ये सांख्यिकी कोड भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार डाक को छांटने का कार्य अत्यंत सरल बना देते हैं।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. स्पीड पोस्ट करने जा रहे हैं तो पहले ध्यान से पढ़ लें यह खबर (हिन्दी) पुरबिया टी.वी.। अभिगमन तिथि: 26 दिसम्बर, 2013।

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