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'''उषा यादव''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Usha Yadav'') समकालीन हिन्दी साहित्यकार तथा लेखिका हैं। वर्ष [[2021]] में उन्हें [[उत्तर प्रदेश]] [[साहित्य]] और शिक्षा की श्रेणी में '[[पद्म श्री]]' से सम्मानित किया गया है। उषा यादव ने अपनी यात्रा के माध्यम से 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें अपने काम के लिए 10 से अधिक प्रमुख प्रशंसा मिली हैं।<br />
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'''उषा यादव''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Usha Yadav'') समकालीन [[हिन्दी]] [[साहित्यकार]] तथा लेखिका हैं। वर्ष [[2021]] में उन्हें [[उत्तर प्रदेश]] [[साहित्य]] और शिक्षा की श्रेणी में '[[पद्म श्री]]' से सम्मानित किया गया है। उषा यादव ने अपनी यात्रा के माध्यम से 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें अपने काम के लिए 10 से अधिक प्रमुख प्रशंसा मिली हैं।<br />
 
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*उषा यादव वरिष्ठ बाल-साहित्यकार [[कानपुर]] निवासी चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक की सुपुत्री एवं के.आर. महाविद्यालय [[मथुरा]] के पूर्व प्राचार्य तथा उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. राजकिशोर सिंह की धर्मपत्नी हैं।
 
*उषा यादव वरिष्ठ बाल-साहित्यकार [[कानपुर]] निवासी चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक की सुपुत्री एवं के.आर. महाविद्यालय [[मथुरा]] के पूर्व प्राचार्य तथा उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. राजकिशोर सिंह की धर्मपत्नी हैं।

09:24, 28 मार्च 2021 के समय का अवतरण

उषा यादव

उषा यादव (अंग्रेज़ी: Usha Yadav) समकालीन हिन्दी साहित्यकार तथा लेखिका हैं। वर्ष 2021 में उन्हें उत्तर प्रदेश साहित्य और शिक्षा की श्रेणी में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया है। उषा यादव ने अपनी यात्रा के माध्यम से 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें अपने काम के लिए 10 से अधिक प्रमुख प्रशंसा मिली हैं।

  • उषा यादव वरिष्ठ बाल-साहित्यकार कानपुर निवासी चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक की सुपुत्री एवं के.आर. महाविद्यालय मथुरा के पूर्व प्राचार्य तथा उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. राजकिशोर सिंह की धर्मपत्नी हैं।
  • वह केन्द्रीय हिंदी संस्थान आगरा, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी विद्यापीठ में भी प्राध्यापन कार्य कर चुकी हैं।
  • साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था इन्द्रधनुष की अध्यक्ष एवं प्राच्य शोध संस्थान की सचिव भी हैं।
  • मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी ने उषा यादव के उपन्यास 'काहे री नलिनी' को 'अखिल भारतीय वीरसिंह देव पुरस्कार' प्रदान किया था।
  • उनकी कुछ लोकप्रिय किताबों में ‘सपने के इंद्रधनुष’, ‘प्रकाश की ओर’, ‘उसके हिस्से की धूप’ आदि हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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